1 इतिहास 23:4
इनमें से चौबीस हजार तो यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त हुए, और छः हजार सरदार और न्यायी।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
Cross References
Deuteronomy 16:18“तू अपने एक-एक गोत्र में से, अपने सब फाटकों के भीतर जिन्हें तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको देता है न्यायी और सरदार नियुक्त कर लेना + 16:18 न्यायी और सरदार नियुक्त कर लेना: मूसा के कूच करने का समय आ गया था और इस्राएली कनान देश में सर्वत्र फैल जाएँगे। अत: नागरिक एवं सामाजिक व्यवस्था तथा सुचारू प्रबन्ध हेतु स्थाई व्यवस्था की आवश्यकता थी। , जो लोगों का न्याय धार्मिकता से किया करें।
1 Chronicles 6:48और इनके भाई जो लेवीय थे वे परमेश्वर के भवन के निवास की सब प्रकार की सेवा के लिये अर्पण किए हुए थे। 1 हारून के पुत्र
1 Chronicles 23:28क्योंकि उनका काम तो हारून की सन्तान की सेवा टहल करना था, अर्थात् यह कि वे आँगनों और कोठरियों में, और सब पवित्र वस्तुओं के शुद्ध करने में और परमेश्वर के भवन की उपासना के सब कामों में सेवा टहल करें;
1 Chronicles 26:29यिसहारियों में से कनन्याह और उसके पुत्र, इस्राएल के देश का काम अर्थात् सरदार और न्यायी का काम करने के लिये नियुक्त हुए।
2 Chronicles 23:18तब यहोयादा ने यहोवा के भवन की सेवा के लिये उन लेवीय याजकों + 23:18 लेवीय याजकों: यह कार्य केवल पुरोहितों का था कि होमबलि चढ़ाएँ (गिन. 18:1-7) और भजन एवं संगीत के द्वारा परमेश्वर की स्तुति का उत्तरदायित्व केवल लेवियों का था। (1 इति. 23:5; 1 इति. 28:1-7) को ठहरा दिया, जिन्हें दाऊद ने यहोवा के भवन पर दल-दल करके इसलिए ठहराया था, कि जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही वे यहोवा को होमबलि चढ़ाया करें, और दाऊद की चलाई हुई विधि के अनुसार आनन्द करें और गाएँ।
Ezra 3:8उनके परमेश्वर के भवन में, जो यरूशलेम में है, आने के दूसरे वर्ष के दूसरे महीने में, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल ने और योसादाक के पुत्र येशुअ ने और उनके अन्य भाइयों ने जो याजक और लेवीय थे, और जितने बँधुआई से यरूशलेम में आए थे उन्होंने भी काम को आरम्भ किया, और बीस वर्ष अथवा उससे अधिक अवस्था के लेवियों को यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त किया + 3:8 लेवियों को यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त किया: यद्धपि बाबेल से लौटनेवाले लेवी संख्या में बहुत कम थे (एज्रा 2:40) उन्हें विशेष करके अलग कर दिया गया था कि मन्दिर निर्माण के कार्य को सम्भाले और आगे बढ़ाए। ।