व्यवस्थाविवरण 8:3
उसने तुझको नम्र बनाया, और भूखा भी होने दिया, फिर वह मन्ना, जिसे न तू और न तेरे पुरखा भी जानते थे, वही तुझको खिलाया; इसलिए कि वह तुझको सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो-जो वचन यहोवा के मुँह + 8:3 मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं .... वचन यहोवा के मुँह: उन्हें यह शिक्षा दी गई कि मनुष्य मात्र प्रकृति के पोषण से नहीं, बल्कि उस प्रकृति के माध्यम से सृजनहार परमेश्वर के द्वारा जीवित रहता है। से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है। (मत्ती 4:4, लूका 4:4, 1 कुरि. 10:3)
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
4इन चालीस वर्षों में तेरे वस्त्र पुराने न हुए, और तेरे तन से भी नहीं गिरे, और न तेरे पाँव फूले।
Cross References
Exodus 16:2जंगल में इस्राएलियों की सारी मण्डली मूसा और हारून के विरुद्ध बुड़बुड़ाने लगे।
Exodus 16:12“इस्राएलियों का बुड़बुड़ाना मैंने सुना है; उनसे कह दे, कि सूर्यास्त के समय तुम माँस खाओगे और भोर को तुम रोटी से तृप्त हो जाओगे; और तुम यह जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।”
Deuteronomy 29:5मैं तो तुम को जंगल में चालीस वर्ष लिए फिरा; और न तुम्हारे तन पर वस्त्र पुराने हुए, और न तेरी जूतियाँ तेरे पैरों में पुरानी हुईं;
Psalms 37:3यहोवा पर भरोसा रख, 1 और भला कर; देश में बसा रह, 1 और सच्चाई में मन लगाए रह। 1
Psalms 104:27इन सब को तेरा ही आसरा है, 1 कि तू उनका आहार समय पर दिया करे। 1
Matthew 4:4यीशु ने उत्तर दिया, “लिखा है, 1 ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, 2 परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।’”