अय्यूब 9:2
“मैं निश्चय जानता हूँ कि बात ऐसी ही है; 1 परन्तु मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में कैसे धर्मी ठहर सकता है + 9:2 मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में कैसे धर्मी ठहर सकता है: अर्थात् परमेश्वर की दृष्टि में मनुष्य को पूर्ण पवित्र नहीं माना जा सकता है। ? 1
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
I know it is so of a truth: but how should man be just with God?
In Context
3चाहे वह उससे मुकद्दमा लड़ना भी चाहे 1 तो भी मनुष्य हजार बातों में से एक का भी उत्तर न दे सकेगा। 1
Cross References
Job 4:17‘क्या नाशवान मनुष्य परमेश्वर से अधिक धर्मी होगा? 1 क्या मनुष्य अपने सृजनहार से अधिक पवित्र हो सकता है? 1
Job 25:4फिर मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी कैसे ठहर सकता है? 1 और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ है वह कैसे निर्मल हो सकता है? 1
Job 32:2और बूजी बारकेल का पुत्र एलीहू + 32:2 एलीहू: इस नाम का अर्थ है परमेश्वर ही वह है या यह शब्द सच्चे परमेश्वर या यहोवा के लिए प्रतिष्ठा गत काम में लिया जाता था इस नाम का अर्थ ऐसा भी है परमेश्वर मेरा परमेश्वर है जो राम के कुल का था, उसका क्रोध भड़क उठा। अय्यूब पर उसका क्रोध इसलिए भड़क उठा, कि उसने परमेश्वर को नहीं, अपने ही को निर्दोष ठहराया।
Job 34:5क्योंकि अय्यूब ने कहा है, ‘मैं निर्दोष हूँ, 1 और परमेश्वर ने मेरा हक़ मार दिया है। 1
Psalms 143:2और अपने दास से मुकद्दमा न चला! 1 क्योंकि कोई प्राणी तेरी दृष्टि में निर्दोष नहीं ठहर सकता। (रोम. 3:20, 1 कुरि. 4:4, गला. 2:16) 1