John 18:20
यीशु ने उसको उत्तर दिया, “मैंने जगत से खुलकर बातें की; मैंने आराधनालयों और मन्दिर में जहाँ सब यहूदी इकट्ठा हुआ करते हैं सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा + 18:20 गुप्त में कुछ भी नहीं कहा: उसने अपने चेलों को ऐसी कोई शिक्षा और आज्ञा नहीं दी जो उसने सार्वजनिक आख्यान में न कही थी। ।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
19तब महायाजक ने यीशु से उसके चेलों के विषय में और उसके उपदेश के विषय में पूछा।
Cross References
Psalms 22:22मैं अपने भाइयों के सामने तेरे नाम का प्रचार करूँगा; 1 सभा के बीच तेरी प्रशंसा करूँगा। (इब्रा. 2:12) 1
Isaiah 45:19मैंने न किसी गुप्त स्थान में, न अंधकार देश के किसी स्थान में बातें की; मैंने याकूब के वंश से नहीं कहा, ‘ मुझे व्यर्थ में ढूँढ़ो + 45:19 मुझे व्यर्थ में ढूँढ़ो: कहने का अर्थ है कि परमेश्वर की सेवा करना व्यर्थ और निरर्थक नहीं रहा है क्योंकि वह उनका रक्षक एवं मित्र रहा है और उनका उसके निकट जाकर अपनी आवश्यकताएँ प्रस्तुत करना व्यर्थ नहीं था।।’ मैं यहोवा सत्य ही कहता हूँ, मैं उचित बातें ही बताता हूँ।
Matthew 4:23और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उनके आराधनालयों में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा।
Matthew 21:23वह मन्दिर में जाकर उपदेश कर रहा था, कि प्रधान याजकों और लोगों के प्राचीनों ने उसके पास आकर पूछा, “तू ये काम किसके अधिकार से करता है? और तुझे यह अधिकार किसने दिया है?”
Matthew 26:55उसी समय यीशु ने भीड़ से कहा, “क्या तुम तलवारें और लाठियाँ लेकर मुझे डाकू के समान पकड़ने के लिये निकले हो? मैं हर दिन मन्दिर में बैठकर उपदेश दिया करता था, और तुम ने मुझे नहीं पकड़ा।
Luke 4:15और वह उन ही आराधनालयों में उपदेश करता रहा, और सब उसकी बड़ाई करते थे। 1 नासरत में यीशु अस्वीकृत