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फिलिप्पियों 2:5

जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो; 1

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

Let this mind be in you, which was also in Christ Jesus:

In Context

4हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन् दूसरों के हित की भी चिन्ता करे। 1 मसीह की दीनता और महानता

6जिसने परमेश्वर के स्वरूप में होकर भी 1 परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में 1 रखने की वस्तु न समझा। 1

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Cross References

Matthew 20:26परन्तु तुम में ऐसा न होगा; परन्तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने;

John 13:14यदि मैंने प्रभु और गुरु होकर तुम्हारे पाँव धोए; तो तुम्हें भी एक दूसरे के पाँव धोना चाहिए।

Acts 20:35मैंने तुम्हें सब कुछ करके दिखाया, कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना, और प्रभु यीशु के वचन स्मरण रखना अवश्य है, कि उसने आप ही कहा है: ‘लेने से देना धन्य है।’”

Romans 15:3क्योंकि मसीह ने अपने आपको प्रसन्न नहीं किया, पर जैसा लिखा है, “तेरे निन्दकों की निन्दा मुझ पर आ पड़ी।” (भज. 69:9)

1 Corinthians 10:33जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूँ, और अपना नहीं, परन्तु बहुतों का लाभ ढूँढ़ता हूँ, कि वे उद्धार पाएँ।

1 Peter 2:21और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुःख उठाकर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है कि तुम भी उसके पद-चिन्ह पर चलो। 1

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