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रोमियों 14:4

तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिर जाना उसके स्वामी ही से सम्बंध रखता है, वरन् वह स्थिर ही कर दिया जाएगा; क्योंकि प्रभु उसे स्थिर रख सकता है।

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

Who art thou that judgest another man’s servant? to his own master he standeth or falleth. Yea, he shall be holden up: for God is able to make him stand.

In Context

3और खानेवाला न-खानेवाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खानेवाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।

5कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर मानता है, और कोई सब दिन एक सा मानता है: हर एक अपने ही मन में निश्चय कर ले।

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Cross References

Psalms 17:5मेरे पाँव तेरे पथों में स्थिर रहे, फिसले नहीं। 1

Psalms 37:24चाहे वह गिरे तो भी पड़ा न रह जाएगा, 1 क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है। 1

Psalms 119:116हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भाल, कि मैं जीवित रहूँ, 1 और मेरी आशा को न तोड़! 1

John 10:28और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूँ, और वे कभी नाश नहीं होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा।

Romans 8:31तो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? (भज. 118:6)

Romans 11:23और वे भी यदि अविश्वास में न रहें, तो साटे जाएँगे क्योंकि परमेश्वर उन्हें फिर साट सकता है।

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