जकर्याह 1:4
अपने पुरखाओं के समान न बनो, उनसे तो पूर्वकाल के भविष्यद्वक्ता यह पुकार पुकारकर कहते थे, ‘सेनाओं का यहोवा यह कहता है, अपने बुरे मार्गों से, और अपने बुरे कामों से फिरो;’ परन्तु उन्होंने न तो सुना, और न मेरी ओर ध्यान दिया, यहोवा की यही वाणी है।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
5तुम्हारे पुरखा कहाँ रहे? भविष्यद्वक्ता क्या सदा जीवित रहते हैं?
Cross References
2 Chronicles 24:19तो भी उसने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएँ; और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया।
2 Chronicles 30:6इसलिए हरकारे राजा और उसके हाकिमों से चिट्ठियाँ लेकर, राजा की आज्ञा के अनुसार सारे इस्राएल और यहूदा में घूमे + 30:6 हरकारे .... सारे इस्राएल और यहूदा में घूमे: पत्रवाहक सम्भवत: घातक: थे जो राजा के अंगरक्षकों का एक भाग थे। (2 राजा. 10:25) , और यह कहते गए, “हे इस्राएलियों! अब्राहम, इसहाक, और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरो, कि वह अश्शूर के राजाओं के हाथ से बचे हुए तुम लोगों की ओर फिरे।
2 Chronicles 34:21“तुम जाकर मेरी ओर से और इस्राएल और यहूदा में रहनेवालों की ओर से इस पाई हुई पुस्तक के वचनों के विषय यहोवा से पूछो; क्योंकि यहोवा की बड़ी ही जलजलाहट हम पर इसलिए भड़की है कि हमारे पुरखाओं ने यहोवा का वचन नहीं माना, और इस पुस्तक में लिखी हुई सब आज्ञाओं का पालन नहीं किया।” 1 हुल्दा की भविष्यद्वाणी
Ezra 9:7अपने पुरखाओं के दिनों से लेकर आज के दिन तक हम बड़े दोषी हैं, और अपने अधर्म के कामों के कारण हम अपने राजाओं और याजकों समेत देश-देश के राजाओं के हाथ में किए गए कि तलवार, दासत्व, लूटे जाने, और मुँह काला हो जाने की विपत्तियों में पड़ें, जैसे कि आज हमारी दशा है।
Nehemiah 9:26“परन्तु वे तुझ से फिरकर बलवा करनेवाले बन गए और तेरी व्यवस्था को त्याग दिया, और तेरे जो नबी तेरी ओर उन्हें फेरने के लिये उनको चिताते रहे उनको उन्होंने घात किया + 9:26 नबी .... उनको उन्होंने घात किया: यहूदी इतिहास में इसकी पुष्टि की गई है कि अनेक महान भविष्यद्वक्ताओं की उन्होंने हत्या की थी (उदाहरणार्थ, यशायाह, यिर्मयाह और यहेजकेल) , और तेरा बहुत तिरस्कार किया।
Psalms 78:8और अपने पितरों के समान न हों, 1 क्योंकि उस पीढ़ी के लोग तो हठीले और झगड़ालू थे, 1 और उन्होंने अपना मन स्थिर न किया था, 1 और न उनकी आत्मा परमेश्वर की ओर सच्ची रही। (2 राजा. 17:14,15) 1