Acts 17:25
न किसी वस्तु की आवश्यकता के कारण मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और श्वास और सब कुछ देता है। (यशा. 42:5, भज. 50:12, भज. 50:12)
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
Cross References
Numbers 16:22तब वे मुँह के बल गिरकर कहने लगे, “हे परमेश्वर, हे सब प्राणियों के आत्माओं के परमेश्वर, क्या एक पुरुष के पाप के कारण तेरा क्रोध सारी मण्डली पर होगा?” (इब्रा. 12:9)
Job 12:10उसके हाथ में एक-एक जीवधारी का प्राण + 12:10 उसके हाथ में एक-एक जीवधारी का प्राण: अर्थात् सब परमेश्वर की पकड़ में है। वही जीवन, स्वास्थ तथा आनन्द देता है परन्तु जब वह प्रसन्न होता है या जब चाहे तब ले लेता है।, और 1 एक-एक देहधारी मनुष्य की आत्मा भी रहती है। 1
Job 27:3क्योंकि अब तक मेरी साँस बराबर आती है, 1 और परमेश्वर का आत्मा मेरे नथुनों में बना है + 27:3 परमेश्वर का आत्मा मेरे नथुनों में बना है: यहाँ परमेश्वर के आत्मा का अर्थ है मनुष्य की सृष्टि के समय परमेश्वर ने जो श्वास उसमें फूँका था।। 1
Job 34:14यदि वह मनुष्य से अपना मन हटाए 1 और अपना आत्मा और श्वास अपने ही में समेट ले, 1
Psalms 16:2मैंने यहोवा से कहा, “तू ही मेरा प्रभु है; 1 तेरे सिवा मेरी भलाई कहीं नहीं।” 1
Psalms 104:27इन सब को तेरा ही आसरा है, 1 कि तू उनका आहार समय पर दिया करे। 1