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सभोपदेशक 1:2

उपदेशक का यह वचन है, “व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है।”

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

Vanity of vanities, saith the Preacher, vanity of vanities; all is vanity.

In Context

1यरूशलेम के राजा, दाऊद के पुत्र और उपदेशक के वचन।

3उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य सूर्य के नीचे करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?

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Cross References

Psalms 39:5देख, तूने मेरी आयु बालिश्त भर की रखी है, 1 और मेरा जीवनकाल तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। 1 सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर 1 क्यों न हों तो भी व्यर्थ ठहरे हैं। (सेला) 1

Psalms 144:4मनुष्य तो साँस के समान है; 1 उसके दिन ढलती हुई छाया के समान हैं। 1

Ecclesiastes 2:11तब मैंने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और सूर्य के नीचे कोई लाभ नहीं। 1 बुद्धिमान और मूर्ख का अन्त

Ecclesiastes 2:17इसलिए मैंने अपने जीवन से घृणा की, क्योंकि जो काम सूर्य के नीचे किया जाता है मुझे बुरा मालूम हुआ; क्योंकि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।

Ecclesiastes 2:21क्योंकि ऐसा मनुष्य भी है, जिसका कार्य परिश्रम और बुद्धि और ज्ञान से होता है और सफल भी होता है, तो भी उसको ऐसे मनुष्य के लिये छोड़ जाना पड़ता है, जिसने उसमें कुछ भी परिश्रम न किया हो। यह भी व्यर्थ और बहुत ही बुरा है।

Ecclesiastes 2:26जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वह बुद्धि और ज्ञान और आनन्द देता है; परन्तु पापी को वह दुःख भरा काम ही देता है कि वह उसको देने के लिये संचय करके ढेर लगाए जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा हो। यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है + 2:26 यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है: यहाँ तक कि परमेश्वर के सर्वोत्तम वरदान, बुद्धि, ज्ञान और आनन्द उस उद्देश्य के लिए हमेशा प्रभावशाली नहीं होते जिसके लिए उन्हें दिया जाता है।।

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