Galatians 3:21
तो क्या व्यवस्था परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विरोध में है? कदापि नहीं! क्योंकि यदि ऐसी व्यवस्था दी जाती जो जीवन दे सकती, तो सचमुच धार्मिकता व्यवस्था से होती।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
20मध्यस्थ तो एक का नहीं होता, परन्तु परमेश्वर एक ही है।
Cross References
Matthew 5:17“यह न समझो, कि मैं व्यवस्था + 5:17 व्यवस्था: यह बाइबल की पहली पाँच पुस्तकों के सन्दर्भ में है जिनमें परमेश्वर की आज्ञाओं और नियमों का संकलन किया गया है। व्यवस्था के इस सम्पूर्ण संग्रह को तोराह कहा जाता था, इसमें परमेश्वर प्रदत्त नैतिकता और अनुष्ठान सम्बंधित नियम निहित थे। या भविष्यद्वक्ताओं की शिक्षाओं को लोप करने आया हूँ, लोप करने नहीं, परन्तु पूरा करने आया हूँ। (रोम. 10:4)
Romans 3:6कदापि नहीं! नहीं तो परमेश्वर कैसे जगत का न्याय करेगा?
Romans 3:31तो क्या हम व्यवस्था को विश्वास के द्वारा व्यर्थ ठहराते हैं + 3:31 तो क्या हम व्यवस्था को विश्वास के द्वारा व्यर्थ ठहराते हैं: तो क्या हम इसे व्यर्थ और बेकार समझते है; क्या हम इसके नैतिक दायित्व को नष्ट करते हैं।? कदापि नहीं! वरन् व्यवस्था को स्थिर करते हैं।
Romans 9:31परन्तु इस्राएली; जो धार्मिकता की व्यवस्था की खोज करते हुए उस व्यवस्था तक नहीं पहुँचे।
Galatians 2:17हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं!
Galatians 2:21मैं परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता, क्योंकि यदि व्यवस्था के द्वारा धार्मिकता होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता।