उत्पत्ति 1:22
परमेश्वर ने यह कहकर उनको आशीष दी + 1:22 परमेश्वर ने यह कहकर उनको आशीष दी: आशीष देने का अर्थ कामना करना है और यहाँ परमेश्वर के सन्दर्भ में इसका अर्थ आशीष पानेवाले के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प लेना।, “फूलो-फलो, और समुद्र के जल में भर जाओ, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ें।”
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
23तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पाँचवाँ दिन हो गया। 1 छठवाँ दिन—भूमि के जीवजन्तु और मनुष्य
Cross References
Genesis 8:17क्या पक्षी, क्या पशु, क्या सब भाँति के रेंगनेवाले जन्तु जो पृथ्वी पर रेंगते हैं; जितने शरीरधारी जीव-जन्तु तेरे संग हैं, उन सब को अपने साथ निकाल ले आ कि पृथ्वी पर उनसे बहुत बच्चे उत्पन्न हों; और वे फूलें-फलें, और पृथ्वी पर फैल जाएँ।”
Genesis 30:27लाबान ने उससे कहा, “यदि तेरी दृष्टि में मैंने अनुग्रह पाया है, तो यहीं रह जा; क्योंकि मैंने अनुभव से जान लिया है कि यहोवा ने तेरे कारण से मुझे आशीष दी है।”
Genesis 35:11फिर परमेश्वर ने उससे कहा, “मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ। तू फूले-फले और बढ़े; और तुझ से एक जाति वरन् जातियों की एक मण्डली भी उत्पन्न होगी, और तेरे वंश में राजा उत्पन्न होंगे।
Job 40:15“उस जलगज को देख, जिसको मैंने तेरे साथ बनाया है, 1 वह बैल के समान घास खाता है। 1
Psalms 107:31लोग यहोवा की करुणा के कारण, 1 और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, 1 उसका धन्यवाद करें। 1
Psalms 128:3तेरे घर के भीतर तेरी स्त्री फलवन्त दाखलता सी होगी; 1 तेरी मेज के चारों ओर तेरे बच्चे जैतून के पौधे के समान होंगे। 1