उत्पत्ति 1:26
फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य + 1:26 मनुष्य: मनुष्य नई प्रजाति है, वह विशेष रूप से इस पृथ्वी के अन्य प्रकार के जीवों से भिन्न है। को अपने स्वरूप के अनुसार + 1:26 अपने स्वरूप के अनुसार: अर्थात् अपनी समानता में। मनुष्य का स्वर्ग से सम्बंध है और इस पृथ्वी का कोई भी प्राणी नहीं है अपनी समानता में बनाएँ; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।” (याकू. 3:9)
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
Cross References
Genesis 3:22फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिए अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़कर खा ले और सदा जीवित रहे।” (प्रका. 2:7, प्रका. 22:2,14,19, उत्प. 3:24, प्रका. 2:7)
Genesis 9:2तुम्हारा डर और भय पृथ्वी के सब पशुओं, और आकाश के सब पक्षियों, और भूमि पर के सब रेंगनेवाले जन्तुओं, और समुद्र की सब मछलियों पर बना रहेगा वे सब तुम्हारे वश में कर दिए जाते हैं।
Genesis 11:7इसलिए आओ, हम उतरकर उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।”
Job 35:10तो भी कोई यह नहीं कहता, ‘मेरा सृजनेवाला परमेश्वर कहाँ है, 1 जो रात में भी गीत गवाता है, 1
Psalms 8:4तो फिर मनुष्य क्या है + 8:4 तो फिर मनुष्य क्या है: मनुष्य कैसा महत्वहीन है, उसका जीवन भाप के समान है वह अति शीघ्र विलोप हो जाता है वह अति पापी और अशुद्ध है कि ऐसा प्रश्न किया जाए। कि तू उसका स्मरण रखे, 1 और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? 1
Psalms 100:3निश्चय जानो कि यहोवा ही परमेश्वर है 1 उसी ने हमको बनाया, और हम उसी के हैं; 1 हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं + 100:3 हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं: जिस प्रकार एक चरवाहा अपने वृन्द का स्वामी होता है, जिस प्रकार चरवाहा अपने वृन्द की रक्षा करता है और उनके लिए प्रावधान करता है, उसी प्रकार परमेश्वर हमारी रक्षा करता है और हमारी सुधि लेता है।। 1