यशायाह 47:10
तूने अपनी दुष्टता पर भरोसा रखा + 47:10 तूने अपनी दुष्टता पर भरोसा रखा: यहाँ निःसंदेह, दुष्टता का अर्थ घमण्ड है अर्थात् उसने यह सोचा था कि वह इनके द्वारा अन्य देशों पर अपनी श्रेष्ठता एवं प्रभुता बनाये रखेगा।, तूने कहा, “मुझे कोई नहीं देखता;” तेरी बुद्धि और ज्ञान ने तुझे बहकाया और तूने अपने मन में कहा, “मैं ही हूँ और मेरे सिवाय कोई दूसरा नहीं।”
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
Cross References
Job 22:13फिर तू कहता है, ‘परमेश्वर क्या जानता है? 1 क्या वह घोर अंधकार की आड़ में होकर न्याय करेगा? 1
Psalms 52:7“देखो, यह वही पुरुष है जिसने परमेश्वर को 1 अपनी शरण नहीं माना, 1 परन्तु अपने धन की बहुतायत पर भरोसा रखता था, 1 और अपने को दुष्टता में दृढ़ करता रहा!” 1
Psalms 64:5वे बुरे काम करने को हियाव बाँधते हैं; 1 वे फंदे लगाने के विषय बातचीत करते हैं; 1 और कहते हैं, “हमको कौन देखेगा?” 1
Ecclesiastes 8:8ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसका वश प्राण पर चले कि वह उसे निकलते समय रोक ले, और न कोई मृत्यु के दिन पर अधिकारी होता है; और न उसे लड़ाई से छुट्टी मिल सकती है, और न दुष्ट लोग + 8:8 दुष्ट लोग: यद्यपि दुष्टों का जीवन लम्बा हो सकता है, फिर भी दुष्टता के पास उस जीवन को बढ़ाने के लिए कोई अंतर्निहित शक्ति नहीं है। अपनी दुष्टता के कारण बच सकते हैं।
Isaiah 28:15तुम ने कहा है “हमने मृत्यु से वाचा बाँधी और अधोलोक से प्रतिज्ञा कराई है; इस कारण विपत्ति जब बाढ़ के समान बढ़ आए तब हमारे पास न आएगी; क्योंकि हमने झूठ की शरण ली और मिथ्या की आड़ में छिपे हुए हैं।”
Isaiah 44:20वह राख खाता है + 44:20 वह राख खाता है: इसका अर्थ है कि मूर्तिपूजा करके उनकी मनोकामना पूरी नहीं होगी। यह ऐसा है जैसे मनुष्य भोजन की खोज करे और अन्ततः वह भोजन राख निगले।; भरमाई हुई बुद्धि के कारण वह भटकाया गया है और वह न अपने को बचा सकता और न यह कह सकता है, “क्या मेरे दाहिने हाथ में मिथ्या नहीं?” 1 परमेश्वर इस्राएल को नहीं भुला