यशायाह 57:17
उसके लोभ के पाप के कारण मैंने क्रोधित होकर उसको दुःख दिया था, और क्रोध के मारे उससे मुँह छिपाया था; परन्तु वह अपने मनमाने मार्ग में दूर भटकता चला गया था।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
Cross References
Ecclesiastes 6:9आँखों से देख लेना मन की चंचलता से उत्तम है: यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है।
Isaiah 5:8हाय उन पर जो घर से घर, और खेत से खेत यहाँ तक मिलाते जाते हैं कि कुछ स्थान नहीं बचता, कि तुम देश के बीच अकेले रह जाओ।
Isaiah 9:13तो भी ये लोग अपने मारनेवाले की ओर नहीं फिरे और न सेनाओं के यहोवा की खोज करते हैं।
Isaiah 56:11वे मरभूखे कुत्ते हैं जो कभी तृप्त नहीं होते। वे चरवाहे हैं जिनमें समझ ही नहीं + 56:11 वे चरवाहे हैं जिनमें समझ ही नहीं: जो मनुष्यों की आवश्यकताओं के प्रति उदासीन हैं और जो समझ नहीं पाते कि उनसे क्या अपेक्षा की गई है। ; उन सभी ने अपने-अपने लाभ के लिये अपना-अपना मार्ग लिया है।
Jeremiah 5:3हे यहोवा, क्या तेरी दृष्टि सच्चाई पर नहीं है? + 5:3 तेरी दृष्टि सच्चाई पर नहीं है?: परमेश्वर विश्वास को देखता है, मन के निष्कपट उद्देश्य को। उसके बिना शपथ की दिखावे की निष्ठा से घृणा करता है। तूने उनको दुःख दिया, परन्तु वे शोकित नहीं हुए; तूने उनको नाश किया, परन्तु उन्होंने ताड़ना से भी नहीं माना। उन्होंने अपना मन चट्टान से भी अधिक कठोर किया है; उन्होंने पश्चाताप करने से इन्कार किया है।
Jeremiah 8:6मैंने ध्यान देकर सुना, परन्तु ये ठीक नहीं बोलते; इनमें से किसी ने अपनी बुराई से पछताकर नहीं कहा + 8:6 किसी ने अपनी बुराई से पछताकर नहीं कहा: किसी भी मनुष्य को अपनी दुष्टता पर पछतावा नहीं हुआ यदि मनुष्य पाप की वास्तविक प्रकृति को समझता तो पापी अपने ऊपर दया होने के कारण मन फिराता।, ‘हाय! मैंने यह क्या किया है?’ जैसा घोड़ा लड़ाई में वेग से दौड़ता है, वैसे ही इनमें से हर एक जन अपनी ही दौड़ में दौड़ता है।