यशायाह 64:6
हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं + 64:6 हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं: यहाँ भावार्थ है कि जैसा लैव्यव्यवस्था में अशुद्ध होना कहा गया है वैसे अशुद्ध एवं दूषित। कहने का अर्थ है कि वे स्वयं को पूर्णतः अशुद्ध एवं पतित मानते हैं। , और हमारे धार्मिकता के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। हम सब के सब पत्ते के समान मुर्झा जाते हैं, और हमारे अधर्म के कामों ने हमें वायु के समान उड़ा दिया है।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
Cross References
Leviticus 13:12और यदि कोढ़ किसी के चर्म में फूटकर यहाँ तक फैल जाए, कि जहाँ कहीं याजक देखे रोगी के सिर से पैर के तलवे तक कोढ़ ने सारे चर्म को छा लिया हो,
Job 14:4अशुद्ध वस्तु से शुद्ध वस्तु को कौन निकाल सकता है? 1 कोई नहीं। 1
Job 25:4फिर मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी कैसे ठहर सकता है? 1 और जो स्त्री से उत्पन्न हुआ है वह कैसे निर्मल हो सकता है? 1
Job 42:5मैंने कानों से तेरा समाचार सुना था, 1 परन्तु अब मेरी आँखें तुझे देखती हैं; 1
Psalms 14:4क्या किसी अनर्थकारी को कुछ भी ज्ञान नहीं रहता, 1 जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी, 1 और यहोवा का नाम नहीं लेते? 1
Psalms 90:5तू मनुष्यों को धारा में बहा देता है; 1 वे स्वप्न से ठहरते हैं, 1 वे भोर को बढ़नेवाली घास के समान होते हैं। 1