The Bible Software
bible.software › यशायाह › यशायाह 66 › यशायाह 66:4

यशायाह 66:4

इसलिए मैं भी उनके लिये दुःख की बातें निकालूँगा, और जिन बातों से वे डरते हैं उन्हीं को उन पर लाऊँगा; क्योंकि जब मैंने उन्हें बुलाया, तब कोई न बोला, और जब मैंने उनसे बातें की, तब उन्होंने मेरी न सुनी; परन्तु जो मेरी दृष्टि में बुरा था वही वे करते रहे, और जिससे मैं अप्रसन्न होता था उसी को उन्होंने अपनाया।”

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

I also will choose their delusions, and will bring their fears upon them; because when I called, none did answer; when I spake, they did not hear: but they did evil before mine eyes, and chose that in which I delighted not.

In Context

3“बैल का बलि करनेवाला मनुष्य के मार डालनेवाले के समान है; जो भेड़ का चढ़ानेवाला है वह उसके समान है जो कुत्ते का गला काटता है; जो अन्नबलि चढ़ाता है वह मानो सूअर का लहू चढ़ानेवाले के समान है; और जो लोबान जलाता है, वह उसके समान है जो मूरत को धन्य कहता है। इन सभी ने अपना-अपना मार्ग चुन लिया है, और घिनौनी वस्तुओं से उनके मन प्रसन्न होते हैं।

5तुम जो यहोवा का वचन सुनकर थरथराते हो यहोवा का यह वचन सुनो: “तुम्हारे भाई जो तुम से बैर रखते और मेरे नाम के निमित्त तुम को अलग कर देते हैं उन्होंने कहा है, ‘यहोवा की महिमा तो बढ़े, जिससे हम तुम्हारा आनन्द देखने पाएँ;’ परन्तु उन्हीं को लज्जित होना पड़ेगा। (2 थिस्स. 1:12) 1 दण्ड और नई जाति

Read all of यशायाह 66

Cross References

2 Kings 21:2उसने उन जातियों के घिनौने कामों के अनुसार, जिनको यहोवा ने इस्राएलियों के सामने देश से निकाल दिया था, वह किया, जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था + 21:2 वह किया, जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था: मनश्शे के राज्यकाल में जो पाप किए गए वे यहूदा राज्य के अपराधों का घड़ा भार देते है और चुने हुओं के अन्तिम शेष भाग के लिए विनाश का अन्तिम दण्ड ले आते है।।

Psalms 81:12इसलिए मैंने उसको उसके मन के हठ पर छोड़ दिया, 1 कि वह अपनी ही युक्तियों के अनुसार चले। (प्रेरि. 14:16) 1

Proverbs 1:31इसलिए वे अपनी करनी का फल आप भोगेंगे, 1 और अपनी युक्तियों के फल से अघा जाएँगे। 1

Isaiah 50:2इसका क्या कारण है कि जब मैं आया तब कोई न मिला? और जब मैंने पुकारा, तब कोई न बोला? क्या मेरा हाथ ऐसा छोटा हो गया है कि छुड़ा नहीं सकता? क्या मुझ में उद्धार करने की शक्ति नहीं? देखो, मैं एक धमकी से समुद्र को सूखा देता हूँ, मैं महानदों को रेगिस्तान बना देता हूँ; उनकी मछलियाँ जल बिना मर जाती और बसाती हैं।

Isaiah 65:2मैं एक हठीली जाति के लोगों की ओर दिन भर हाथ फैलाए रहा, जो अपनी युक्तियों के अनुसार बुरे मार्गों में चलते हैं। (रोम. 10:20,21)

Isaiah 65:12मैं तुम्हें गिन-गिनकर तलवार का कौर बनाऊँगा, और तुम सब घात होने के लिये झुकोगे; क्योंकि, जब मैंने तुम्हें बुलाया तुम ने उत्तर न दिया, जब मैं बोला, तब तुम ने मेरी न सुनी; वरन् जो मुझे बुरा लगता है वही तुम ने नित किया, और जिससे मैं अप्रसन्न होता हूँ, उसी को तुम ने अपनाया।”

This Verse In Other Editions

King James VersionBíblia Almeida (Português)Luther Bibel (Deutsch)Bible Louis Segond (Français)Библия (Русский)聖經 (中文)성경 (한국어)الكتاب المقدس (العربية)Biblia (Kiswahili)Bibbia Diodati (Italiano)Alkitab (Bahasa Indonesia)Kinh Thánh (Tiếng Việt)Biblia Cornilescu (Română)

Study यशायाह 66:4

Matthew HenryJamieson-Fausset-BrownAdam ClarkeJohn WesleyJohn CalvinKeil and DelitzschScofieldFamily Bible NotesGeneva Bible Notes (1599)
← यशायाह 66:3यशायाह 66यशायाह 66:5 →