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Matthew 4:2

वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, तब उसे भूख लगी। (निर्ग. 34:28)

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

And when he had fasted forty days and forty nights, he was afterward an hungred.

In Context

1तब उस समय पवित्र आत्मा यीशु को एकांत में ले गया ताकि शैतान से उसकी परीक्षा हो। + 4:1: यीशु की परीक्षा लेने में शैतान की मंशा थी कि मसीह को विवश करके उससे पाप करवाए जिससे की वह उद्धारकर्ता के रूप में अयोग्‍य ठहरे और मनुष्य की मुक्ति, परमेश्वर की योजना में नाकाम हो जाए।

3तब परखनेवाले ने पास आकर उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे, कि ये पत्थर रोटियाँ बन जाएँ।”

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Cross References

Exodus 24:18तब मूसा बादल के बीच में प्रवेश करके पर्वत पर चढ़ गया। और मूसा पर्वत पर चालीस दिन और चालीस रात रहा।

Deuteronomy 9:9जब मैं उस वाचा के पत्थर की पटियाओं को जो यहोवा ने तुम से बाँधी थी लेने के लिये पर्वत के ऊपर चढ़ गया, तब चालीस दिन और चालीस रात पर्वत ही के ऊपर रहा; और मैंने न तो रोटी खाई न पानी पिया।

Deuteronomy 9:25“मैं यहोवा के सामने चालीस दिन और चालीस रात मुँह के बल पड़ा रहा, क्योंकि यहोवा ने कह दिया था, कि वह तुम्हारा सत्यानाश करेगा।

1 Kings 19:8तब उसने उठकर खाया पिया; और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन-रात चलते-चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुँचा।

Mark 11:12दूसरे दिन जब वे बैतनिय्याह से निकले तो उसको भूख लगी।

John 4:6और याकूब का कुआँ भी वहीं था। यीशु मार्ग का थका हुआ उस कुएँ पर ऐसे ही बैठ गया। और यह बात दोपहर के समय हुई।

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