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रोमियों 1:25

क्योंकि उन्होंने परमेश्वर की सच्चाई को बदलकर झूठ बना डाला, और सृष्टि की उपासना और सेवा की, न कि उस सृजनहार की जो सदा धन्य है। आमीन। (यिर्म. 13:25, यिर्म. 16:19)

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

Who changed the truth of God into a lie, and worshipped and served the creature more than the Creator, who is blessed for ever. Amen.

In Context

24इस कारण परमेश्वर ने उन्हें उनके मन की अभिलाषाओं के अनुसार अशुद्धता के लिये छोड़ दिया, कि वे आपस में अपने शरीरों का अनादर करें।

26इसलिए परमेश्वर ने उन्हें नीच कामनाओं के वश में छोड़ दिया; यहाँ तक कि उनकी स्त्रियों ने भी स्वाभाविक व्यवहार को उससे जो स्वभाव के विरुद्ध है, बदल डाला।

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Cross References

Psalms 145:1हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूँगा, 1 और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूँगा। 1

Jeremiah 10:14सब मनुष्य मूर्ख और ज्ञानरहित + 10:14 ज्ञानरहित: उनकी अशक्त मूर्तियों की तुलना उष्ण कटिबन्धीय आँधी की भीषणता के साथ करके देखने पर, जो मनुष्य अब भी मूर्तियों की पूजा करता वह निर्बुद्धि ही है। हैं; अपनी खोदी हुई मूरतों के कारण सब सुनारों की आशा टूटती है; क्योंकि उनकी ढाली हुई मूरतें झूठी हैं, और उनमें साँस ही नहीं है। (यिर्म. 51:17,18)

Jeremiah 16:19हे यहोवा, हे मेरे बल और दृढ़ गढ़, संकट के समय मेरे शरणस्थान, जाति-जाति के लोग पृथ्वी की चारों ओर से तेरे पास आकर कहेंगे, “निश्चय हमारे पुरखा झूठी, व्यर्थ और निष्फल वस्तुओं को अपनाते आए हैं। (रोम. 1:25)

Habakkuk 2:18खुदी हुई मूरत में क्या लाभ देखकर + 2:18 खुदी हुई मूरत में क्या लाभ देखकर: यह मूर्तिपूजा की विशेष मूर्खता थी। उसकी रचना हस्तकार से भी कम है। यह मूर्तिपूजा का एक भ्रष्ट विचार है कि कलाकार अपनी ही रची हुई वस्तु में आस्था रखे। बनानेवाले ने उसे खोदा है? फिर झूठ सिखानेवाली और ढली हुई मूरत में क्या लाभ देखकर ढालनेवाले ने उस पर इतना भरोसा रखा है कि न बोलनेवाली और निकम्मी मूरत बनाए?

Matthew 10:37“जो माता या पिता को मुझसे अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझसे अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं। (लूका 14:26)

Romans 1:18परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं।

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