Genesis 7:11
जब नूह की आयु के छः सौवें वर्ष के दूसरे महीने का सत्रहवाँ दिन आया; उसी दिन बड़े गहरे समुद्र के सब सोते फूट निकले और आकाश के झरोखे खुल गए।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
10सात दिन के उपरान्त प्रलय का जल पृथ्वी पर आने लगा। 1 जल-प्रलय
12और वर्षा चालीस दिन और चालीस रात निरन्तर पृथ्वी पर होती रही।
Cross References
Genesis 1:7तब परमेश्वर ने एक अन्तर करके उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग-अलग किया; और वैसा ही हो गया।
Genesis 8:2गहरे समुद्र के सोते और आकाश के झरोखे बंद हो गए; और उससे जो वर्षा होती थी वह भी थम गई।
2 Kings 7:2तब उस सरदार ने जिसके हाथ पर राजा तकिया करता था, परमेश्वर के भक्त को उत्तर देकर कहा, “सुन, चाहे यहोवा आकाश के झरोखे खोले, तो भी क्या ऐसी बात हो सकेगी?” उसने कहा, “सुन, तू यह अपनी आँखों से तो देखेगा, परन्तु उस अन्न में से कुछ खाने न पाएगा।”
Job 28:4जहाँ लोग रहते हैं वहाँ से दूर वे खानि खोदते हैं 1 वहाँ पृथ्वी पर चलनेवालों के भूले-बिसरे हुए + 28:4 वहाँ पृथ्वी पर चलनेवालों के भूले-बिसरे हुए वहाँ किसी के पांव नहीं पड़ते 1 वे मनुष्यों से दूर लटके हुए झूलते रहते हैं। 1
Job 38:37कौन बुद्धि से बादलों को गिन सकता है? 1 और कौन आकाश के कुप्पों को उण्डेल सकता है, 1
Psalms 74:15तूने तो सोता खोलकर जल की धारा बहाई, 1 तूने तो बारहमासी नदियों को सूखा डाला। 1