Matthew 13:15
क्योंकि इन लोगों के मन सुस्त हो गए है, 1 और वे कानों से ऊँचा सुनते हैं 1 और उन्होंने अपनी आँखें मूँद लीं हैं; 1 कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें, 1 और कानों से सुनें और मन से समझें, 1 और फिर जाएँ, और मैं उन्हें चंगा करूँ।’
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
16“पर धन्य है तुम्हारी आँखें, कि वे देखती हैं; और तुम्हारे कान, कि वे सुनते हैं।
Cross References
Psalms 119:70उनका मन मोटा हो गया है, 1 परन्तु मैं तेरी व्यवस्था के कारण सुखी हूँ। 1
Isaiah 6:10तू इन लोगों के मन को मोटे + 6:10 मन को मोटे: यहाँ मन के उपयोग का अभिप्राय उनकी सब मानसिक शक्तियों से है। और उनके कानों को भारी कर, और उनकी आँखों को बन्द कर; ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से बूझें, और मन फिराएँ और चंगे हो जाएँ।” (मत्ती 13:15, यूह. 12:40, प्रेरि. 28:26,27, रोम. 11:8)
Isaiah 44:20वह राख खाता है + 44:20 वह राख खाता है: इसका अर्थ है कि मूर्तिपूजा करके उनकी मनोकामना पूरी नहीं होगी। यह ऐसा है जैसे मनुष्य भोजन की खोज करे और अन्ततः वह भोजन राख निगले।; भरमाई हुई बुद्धि के कारण वह भटकाया गया है और वह न अपने को बचा सकता और न यह कह सकता है, “क्या मेरे दाहिने हाथ में मिथ्या नहीं?” 1 परमेश्वर इस्राएल को नहीं भुला
Jeremiah 3:22“हे भटकनेवाले बच्चों, लौट आओ, मैं तुम्हारा भटकना सुधार दूँगा। देख, हम तेरे पास आए हैं; क्योंकि तू ही हमारा परमेश्वर यहोवा है।
Jeremiah 33:6देख, मैं इस नगर का इलाज करके इसके निवासियों को चंगा करूँगा; और उन पर पूरी शान्ति और सच्चाई प्रगट करूँगा।
Zechariah 7:11परन्तु उन्होंने चित्त लगाना न चाहा, और हठ किया, और अपने कानों को बन्द कर लिया ताकि सुन न सके।