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Romans 4:6

जिसे परमेश्वर बिना कर्मों के धर्मी ठहराता है, उसे दाऊद भी धन्य कहता है: 1

बाइबल (हिन्दी)

In The King James Version

Even as David also describeth the blessedness of the man, unto whom God imputeth righteousness without works,

In Context

5परन्तु जो काम नहीं करता वरन् भक्तिहीन के धर्मी ठहरानेवाले पर विश्वास करता है, उसका विश्वास उसके लिये धार्मिकता गिना जाता है।

7“धन्य वे हैं, जिनके अधर्म क्षमा हुए, 1 और जिनके पाप ढांपे गए। 1

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Cross References

Psalms 1:1क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की योजना पर + 1:1 योजना पर: पाप करनेवालों की राय नहीं मानता है। वह उनके विचारों और सुझावों के अनुसार अपना जीवन नहीं जीता है। नहीं चलता, 1 और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; 1 और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है! 1

Psalms 146:5क्या ही धन्य वह है, 1 जिसका सहायक याकूब का परमेश्वर है, 1 और जिसकी आशा अपने परमेश्वर यहोवा पर है। 1

Isaiah 54:17जितने हथियार तेरी हानि के लिये बनाए जाएँ, उनमें से कोई सफल न होगा, और जितने लोग मुद्दई होकर तुझ पर नालिश करें उन सभी से तू जीत जाएगा। यहोवा के दासों का यही भाग होगा, और वे मेरे ही कारण धर्मी ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है।”

Jeremiah 33:16उन दिनों में यहूदा बचा रहेगा और यरूशलेम निडर बसा रहेगा; और उसका नाम यह रखा जाएगा अर्थात् ‘यहोवा हमारी धार्मिकता।’

Matthew 5:3“धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, 2 क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। 1

Romans 3:20क्योंकि व्यवस्था के कामों + 3:20 व्यवस्था के कामों: कामों के द्वारा या इस तरह के काम जो व्यवस्था की माँग है। से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिए कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहचान होती है। (भज. 143:2) 1 विश्वास के द्वारा परमेश्वर की धार्मिकता

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