रोमियों 9:20
हे मनुष्य, भला तू कौन है, जो परमेश्वर का सामना करता है? क्या गढ़ी हुई वस्तु गढ़नेवाले से कह सकती है, “तूने मुझे ऐसा क्यों बनाया है?”
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
19फिर तू मुझसे कहेगा, “वह फिर क्यों दोष लगाता है? कौन उसकी इच्छा का सामना करता है?”
Cross References
Job 16:3क्या व्यर्थ बातों का अन्त कभी होगा? 1 तू कौन सी बात से झिड़ककर ऐसे उत्तर देता है? 1
Job 36:23किसने उसके चलने का मार्ग ठहराया है? 1 और कौन उससे कह सकता है, ‘तूने अनुचित काम किया है?’ 1
Job 40:2“क्या जो बकवास करता है वह सर्वशक्तिमान से झगड़ा करे? 1 जो परमेश्वर से विवाद करता है वह इसका उत्तर दे।” 1 अय्यूब का परमेश्वर को उत्तर
Job 40:8क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? 1 क्या तू आप निर्दोष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा? 1
Isaiah 29:16तुम्हारी कैसी उलटी समझ है! क्या कुम्हार मिट्टी के तुल्य गिना जाएगा? क्या बनाई हुई वस्तु अपने कर्ता के विषय कहे “उसने मुझे नहीं बनाया,” या रची हुई वस्तु अपने रचनेवाले के विषय कहे, “वह कुछ समझ नहीं रखता?” (रोम. 9:20,21)
Isaiah 64:8तो भी, हे यहोवा, तू हमारा पिता है; देख, हम तो मिट्टी है, और तू हमारा कुम्हार है; हम सब के सब तेरे हाथ के काम हैं + 64:8 हम सब के सब तेरे हाथ के काम हैं: जैसे मिट्टी का पात्र कुम्हार के हाथ का काम होता है। हम तेरे द्वारा बनाये गये हैं और तुम ही पर निर्भर हैं कि तू हमें जैसा चाहे वैसा बनाये। । (भज. 100:3, गला. 3:26)