रोमियों 3:19
हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के अधीन हैं इसलिए कि हर एक मुँह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे।
बाइबल (हिन्दी)
In The King James Version
In Context
18उनकी आँखों के सामने परमेश्वर का भय नहीं।” (भज. 36:1)
Cross References
1 Samuel 2:9“वह अपने भक्तों के पाँवों को सम्भाले रहेगा, 1 परन्तु दुष्ट अंधियारे में चुपचाप पड़े रहेंगे; 1 क्योंकि कोई मनुष्य अपने बल के कारण प्रबल न होगा। 1
Job 9:2“मैं निश्चय जानता हूँ कि बात ऐसी ही है; 1 परन्तु मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में कैसे धर्मी ठहर सकता है + 9:2 मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में कैसे धर्मी ठहर सकता है: अर्थात् परमेश्वर की दृष्टि में मनुष्य को पूर्ण पवित्र नहीं माना जा सकता है। ? 1
Ezekiel 16:63जिससे तू स्मरण करके लज्जित हो, और लज्जा के मारे फिर कभी मुँह न खोले। यह उस समय होगा, जब मैं तेरे सब कामों को ढाँपूँगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।” (भज. 78:38)
John 8:9परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से लेकर छोटों तक एक-एक करके निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई।
John 15:25और यह इसलिए हुआ, कि वह वचन पूरा हो, जो उनकी व्यवस्था में लिखा है, ‘उन्होंने मुझसे व्यर्थ बैर किया।’ (भज. 69:4, भज. 109:3)
Romans 2:1अतः हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो, तू निरुत्तर है; क्योंकि जिस बात में तू दूसरे पर दोष लगाता है, उसी बात में अपने आपको भी दोषी ठहराता है, इसलिए कि तू जो दोष लगाता है, स्वयं ही वही काम करता है।